top of page
Search

कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में अहम ब्रह्मास्मि का उद्घोष

  • moonjedr
  • Dec 16, 2019
  • 4 min read

२० जुलाई,२०१९ की शाम कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया के इतिहास में एक भव्य और सार्थक समारोह का नाम जुड़ गया। देवभाषा संस्कृत में निर्मित पहली मुख्यधारा की फ़िल्म अहम ब्रह्मास्मि के ट्रेलर का प्रदर्शन किया गया। भारतीय सिनमा के आधार स्तम्भ - द बॉम्बे टॉकीज़ स्टूडियोज़ और महिला निर्मात्री कामिनी दुबे के संयुक्त निर्माण और सैन्य विद्यालय के यशस्वी राष्ट्रवादी छात्र एवं फ़िल्मकार आज़ाद के द्वारा लिखित-निर्देशित-अभिनीत फ़िल्म अहम ब्रह्मास्मि शीघ्र प्रदर्शन हेतु तैय्यार है। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने फ़िल्म का ट्रेलर देखकर प्रसन्न मुद्रा में आज़ाद और फ़िल्म की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस विरल रचनात्मक कार्य के द्वारा देश और विदेश में देव भाषा संस्कृत के विकास में आज़ाद के योगदान की चर्चा की। आमंत्रित गणमान्य अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि फ़िल्मकार आज़ाद का विश्व पटल पर संस्कृत को पुनर्जीवित करने का प्रयास और प्रचार प्रसार एक भगीरथ प्रयास है।

Aham Brahmasmi

इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित प्रमुख अतिथि केंद्रीय विश्व विद्यालय, हरियाणा के कुलपति, प्रोफेसर रमेश चन्द्र कुहड़ ने फ़िल्मकार आज़ाद को चंद्रशेखर आज़ाद के व्यक्तित्व को विश्व पटल पर पहुँचाने के लिए और फ्रांस के कान फ़िल्म मोहत्सव में भारत का सम्मान बढ़ाने के लिए कला के गौरव के रूप में सरस्वती पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

बॉम्बे टॉकीज़ की परम्परा हमेशा से ही सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई विचरोत्तेजक फ़िल्मों के सृजन का रहा है।उसी परम्परा का अनुपालन करते हुए सनातनी राष्ट्रवादी फ़िल्मकार आज़ाद ने भारत की सभ्यता और संस्कृति को संस्कृत के माध्यम से विश्व समुदाय को जोड़ने का काम किया है। ज्ञातव्य है कि छः दशकों के अंतराल के बाद बॉम्बे टॉकीज़ का आज़ाद के नेतृत्व में राष्ट्रपुत्र के साथ भव्य पुनरागमन हुआ है। अहम ब्रह्मास्मि उसकी सफलता और कलात्मक विस्फोट की अगली कड़ी है।

आज़ाद की बहुप्रतिक्षित फ़िल्म ‘अहम ब्रह्मास्मि’ के संदर्भ में आज़ाद ने कहा की भारत को जानने और समझने के लिए संस्कृत की शरण में आना होगा। संस्कृत है तो संस्कृति है। आज़ाद ने ज़ोर देकर कहा कि हमें अपनी सनातन संस्कृति पर गर्व है। ‘अहम ब्रह्मास्मि’ महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद के जीवन और दर्शन पर आधारित वर्तमान की फ़िल्म है। फ़िल्मकार आज़ाद फ़िल्म के ज़रिए विश्व मानवता का संदेश देना चाहते हैं।

इस अवसर पर ख्यातिप्राप्त फ़िल्मकार आज़ाद ने कहा कि राष्ट्रपुत्र का कान फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शन होना वस्तुतः आज़ाद के विचारों और दर्शन का वैश्विक प्रदर्शन है। मेरी नवीनतम कृति अहं ब्रह्मास्मि विश्व पटल पर प्रदर्शित हो कर देव भाषा संस्कृत एवं भारतीय सनातन संस्कृति को विश्व समुदाय से जीवन के मूल्यों का परिचय कराएगी। अहं ब्रह्मास्मि केवल एक फ़िल्म ही नही है बल्कि सिनेमा के परदे पर भारतीय सभ्यता और देव भाषा संस्कृत की वैज्ञानिकता और उपयोगिता का गौरव एवं गरिमा पूर्ण सृजन है।

Megastar Aazaad

संस्कृत भाषा एवं विश्व की पहली मुख्यधारा की संस्कृत फिल्म के प्रति समर्पित इस विरल समारोह में केंद्रीय विश्व विद्यालय, हरियाणा के कुलपति, प्रोफेसर रमेश चन्द्र कुहड़ ने ज़ोर देकर कहा संस्कृत वर्तमान और भविष्य के सनातनी पीढ़ियों के लिए अनिवार्य रूप से जीवन उर्जा है और रहेगा। संस्कृत के बिना संस्कृति की पहचान एवं संरक्षण असंभव है। संस्कृत केवल भाषा मात्र नही है अपितु हमारे पूर्वजों से प्राप्त हृदय को झंकृत कर देने वाली उर्जा है।






Aham Brahmasmi Sanskrit Movie

इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ एवं सनातनी शिक्षाविद डॉ. हरि राम मिश्र ने कहा कि यह एक समर्पित एवं राष्ट्रवादी फिल्मकार आज़ाद की महान उपलब्धि के साथ मातृभूमि के प्रति उनका कलात्मक समर्पण है। दशकों से, मैं जे.एन.यू में राष्ट्रविरोधी विचार धारा से लड़ता रहा हूँ और आज़ाद कि फिल्म अहं ब्रह्मास्मि राष्ट्रविरोधी तत्वों को करारा जवाब है। इस फिल्म के साथ हर प्रकार से जुड़ा हुआ हूँ। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सभी शिक्षा संस्थानों में इस अद्वितीय सिनेमाई कृति का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से होगा इसके लिए मैं दृढ़ संकल्पित हूँ।

उपस्थित गणमान्य अतिथियों में संस्कृता भारती के उत्तर क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री जय प्रकाश गौतम ने संस्कृत में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हमें अपने सनातन संस्कृति और ऋषि परंपरा के संवर्धन के लिए सबसे वैज्ञानिक एवं संस्कारित भाषा संस्कृत की उपयोगिता को समझें। आज़ाद ने जिस समर्पण के साथ संस्कृत के उत्थान के लिए अहं ब्रह्मास्मि का सृजन किया है उसके लिए साधुवाद है।

इस विशेष समारोह में लेखक, कवि एवं बॉम्बे टॉकीज़ के लेखन विभाग के अध्यक्ष अभिजित घटवारी ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में उदघोष किया कि मूल श्रेष्ठ है इसलिए दिव्यता एवं पूर्णता के लिए मूल की तरफ लौटना अनिवार्य है। अभिजित घटवारी ने संस्कृत के माध्यम से जीवन के महोत्सव में भाग लेने के लिए विश्व समुदाय को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन ही अति मानव में रूपांतरण का बीज है। फिल्मकार आज़ाद हमारे बीच में एक धरोहर की तरह है, उनके तरकश से पहले राष्ट्रपुत्र निकला और अब अहं ब्रह्मास्मि। आने वाले कल में पुरे विश्व को जोड़ने के लिए राष्ट्रविरोधियों के खात्मे के लिए एक से एक तीर निकलते रहेंगे।

आज़ाद ने कालजयी फ़िल्म अहम ब्रह्मास्मि के निर्माण के लिए भारत कि ख्यतिलब्ध महिलाओं में शुमार निर्मात्री कामिनी दुबे, महान फ़िल्म कम्पनी ‘द बॉम्बे टॉकीज़ स्टूडीयोज़’ जिसे भारतीय सिनेमा के आधार स्तंभ‘राजनारायण दुबे’ ने १९३४ में स्थापित किया था, १९२९ में स्थापित फ़ाइनैन्स कम्पनी दुबे इंडुस्ट्रीज़, अन्तर्राष्ट्रीय ट्रस्ट ‘बॉम्बे टॉकीज़ फ़ाउंडेशन’, वर्ल्ड लिटरेचर आर्गेनाइजेशन, ‘आज़ाद फ़ेडरेशन’ और १९२२ में कुमारी छवि देवी द्वारा स्थापित भारत की प्राचीन संस्था ‘विश्व साहित्य परिषद’ को धन्यवाद दिया।


 
 
 

Comments


+919322411111  |  info@bombaytalkies.co

1 Ghanshyam Dube Tower, M G road, Borivali (East), Mumbai, Maharashtra, India – 400066

  • Instagram
  • Black Facebook Icon
  • Black Twitter Icon
  • Black YouTube Icon

© 2019 by B.S. Moonje

bottom of page